दिवाली से पहले सोने-चांदी में आएगी तेजी
Gold Silver: दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आएगी या इनकी चमक फीकी पड़ती रहेगी? आने वाले सप्ताह में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी डॉलर की चाल और भारतीय रुपये में मजबूती कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
हाल के कारोबारी सत्रों में सोने और चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले सप्ताह 3,581 रुपये यानी 2.4 प्रतिशत टूटकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी का वायदा भाव 14,568 रुपये यानी 6.4 प्रतिशत गिरकर 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, आगामी सप्ताह में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में दिवाली से पहले सोने-चांदी की खरीदारी करने वाले ग्राहकों और निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों तथा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर रहेगी।
आने वाले सप्ताह में निवेशकों के लिए चीन के आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। चीन की औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों का असर औद्योगिक धातुओं की मांग पर पड़ सकता है। चांदी का इस्तेमाल निवेश के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है, इसलिए इसकी कीमतों पर आर्थिक गतिविधियों का असर सोने के मुकाबले अलग हो सकता है।
इसके अलावा, अमेरिका के आवास बाजार से जुड़े आंकड़े, उपभोक्ता धारणा, महंगाई की उम्मीदें और भारत, ब्रिटेन तथा अमेरिका के खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं।
निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर भी रहेगी। ब्याज दरों को लेकर किसी भी संकेत का असर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों में बदलाव संभव है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सोने पर क्या असर होगा?
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। यदि महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव आ सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी रुख कर सकते हैं। ऐसे में सोने को समर्थन मिल सकता है। यही वजह है कि आने वाले सप्ताह में सोने की कीमतों की दिशा पर एक साथ कई विपरीत कारकों का असर देखने को मिल सकता है।
ब्रोकरेज मंच लेमॉन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है। उनके मुताबिक, ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर सकती हैं, जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी सोने और चांदी को कुछ समर्थन दे सकती है।
MCX पर सोने की कीमत में कितनी गिरावट आई?
पिछले सप्ताह घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव 3,581 रुपये घटकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। प्रतिशत के आधार पर इसमें 2.4 फीसदी की गिरावट आई।इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल के साथ भारतीय रुपये की मजबूती भी एक अहम कारण रही। भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में रुपये के मजबूत होने से आयातित सोने की लागत घट सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में मजबूती आने से घरेलू बाजार में सोने की कीमत पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। यही वजह रही कि घरेलू बाजार में सोने की गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में अधिक रही।हालांकि, आगे सोने की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
भारतीय रुपये की मजबूती ने कैसे बदला बाजार का रुख?
पिछले पांच कारोबारी सत्रों में रुपये में उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रुपया 96.8 के स्तर से मजबूत होकर 94.8 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें 180 पैसे से अधिक की मजबूती दर्ज की गई।रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप और कारोबारियों की डॉलर खरीद से जुड़ी गतिविधियों का असर रहा। रुपये में मजबूती से आयातकों को राहत मिल सकती है, क्योंकि विदेशी मुद्रा में होने वाली खरीद की रुपये में लागत कम हो जाती है।सोने के मामले में इसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है। पिछले सप्ताह रुपये में मजबूती के साथ घरेलू बाजार में चार कारोबारी सत्रों के दौरान सोने की कीमत 3,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक गिर गई।


