अनिल अंबानी की Reliance Power पर ED की कार्रवाई, ₹2,032 करोड़ की संपत्ति जब्त
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अनिल अंबानी की रिलायंस पावर पर बड़ी खबर आई है। कंपनी को एक बड़ा झटका लगा है। ईडी ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड को विदेशी मुद्रा नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में 2032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है।
ED की इस कार्रवाई से कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, सासन पावर लिमिटेड में 2,026.65 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर और कुल 6.16 करोड़ रुपये का बैंक बैलेंस शामिल है। यानी कंपनी फिलहाल अभी 2,026.65 करोड़ रुपये के शेयर और 6.16 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस का इस्तेमाल नहीं कर सकती।
रिलायंस पावर ने क्या बताया
अनिल अंबानी की रिलायंस पावर ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 12 अक्टूबर को बताया कि उसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) की धारा 37A(1) के तहत यह आदेश मिला।
फाइलिंग के अनुसार ED की कार्रवाई 2006 में जारी किए गए फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCBs) और सिंगापुर स्थित सब्सिडियरी के जरिए 2008 में किए गए विदेशी निवेश से जुड़ी है।
रिलायंस पावर ने लिखा- “यह आदेश 2006 में जारी किए गए फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (यानी 20 साल पहले) और 2008 में सिंगापुर की एक सब्सिडियरी में किए गए विदेशी निवेश (यानी 18 साल पहले) से जुड़ा है, जिसके लिए सभी जरूरी मंजूरियां ली गई थीं। जब्ती की कार्रवाई मुख्य रूप से कंपनी की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी, सासन पावर लिमिटेड में मौजूद शेयरों से जुड़ी है। ये शेयर पहले से ही पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (भारत सरकार का एक उपक्रम) के पक्ष में 10 साल से ज्यादा समय से सिक्योरिटी अरेंजमेंट के तहत गिरवी रखे गए हैं। इसके अलावा, इसमें कंपनी के कुछ बैंक बैलेंस भी शामिल हैं।”
कैसे रहा है रिलायंस पावर के शेयरों का हाल
रिलायंस पावर के शेयरों में इस साल अब तक 42 प्रतिशत और पिछले एक साल में 55 प्रतिशत की गिरावट आई है। बुधवार को दोपहर तीन बजे रिलायंस पावर के शेयर 0.55% की गिरावट के साथ 19.9 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई शेयर बाजार से संबंधित जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। इसे निवेश की सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें तथा किसी सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श लें।


