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अक्टूबर की गिरावट के बाद सोने-चांदी में आया बड़ा उलटफेर! नवंबर में छिपा है ऐसा संकेत

अक्टूबर की गिरावट के बाद सोने-चांदी में आया बड़ा उलटफेर! नवंबर में छिपा है ऐसा संकेत

Silver Price Today: अक्टूबर महीने में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट के बाद नवंबर की शुरुआत में बाजार का रुख कुछ बदलता हुआ नजर आ रहा है। पिछले महीने जहां सोने ने करीब 7 फीसदी और चांदी ने करीब 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की, वहीं नवंबर की शुरुआत में दोनों की कीमतों में रिकवरी देखने को मिली है।

खास बात यह है कि चांदी ने सोने के मुकाबले ज्यादा तेज वापसी की है। ऐसे में अब निवेशकों और खरीदारों की नजर इस बात पर है कि यह सिर्फ अस्थायी उछाल है या आने वाले दिनों में कीमती धातुओं में एक नई तेजी की शुरुआत हो सकती है।

अक्टूबर में क्यों टूटा सोना-चांदी का बाजार?

अक्टूबर 2026 सोने और चांदी के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला महीना रहा। MCX पर अक्टूबर के दौरान सोने के वायदा भाव में लगभग 7 फीसदी की गिरावट आई, जबकि चांदी में करीब 20 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। यानी चांदी की कीमतों में गिरावट सोने के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा रही।

बाजार में इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण बताए गए। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई को लेकर चिंता और वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव कीमती धातुओं पर भारी पड़ा।

सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना मजबूत होती है तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली संपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं। इसी वजह से ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों में बदलाव का सीधा असर सोने की कीमतों पर दिखाई देता है।

नवंबर की शुरुआत में क्यों बदला बाजार?

अक्टूबर के आखिरी दिनों में भारी बिकवाली के बाद नवंबर की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों में कुछ राहत दिखाई दी। 2 नवंबर को MCX पर सोने और चांदी के भाव में रिकवरी देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं ने निचले स्तरों से वापसी की।

इस रिकवरी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भी एक कारण माना जा रहा है। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई को लेकर दबाव कम होने की उम्मीद बनती है, जिससे कीमती धातुओं को कुछ समर्थन मिल सकता है।

इसके अलावा धनतेरस और दिवाली से पहले घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद भी सोने के भाव को सहारा दे रही है। दिल्ली के बाजार में 2 नवंबर को 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने का भाव ₹500 बढ़कर करीब ₹1,42,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। वहीं चांदी करीब ₹1.86 लाख प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

IBJA के आंकड़ों में क्या तस्वीर दिख रही है?

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के 2 नवंबर के शाम के बेंचमार्क के मुताबिक 24 कैरेट यानी 999 शुद्धता वाले सोने का भाव ₹1,37,524 प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं 22 कैरेट यानी 916 शुद्धता वाला सोना ₹1,25,990 प्रति 10 ग्राम और 999 शुद्धता वाली चांदी ₹1,79,972 प्रति किलोग्राम रही।

2 नवंबर के सुबह के IBJA बेंचमार्क में 24 कैरेट सोना ₹1,37,772 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹1,80,080 प्रति किलोग्राम थी। इसका मतलब है कि एक ही दिन में सुबह से शाम तक भी कीमतों में बदलाव देखने को मिला।

ध्यान रखना जरूरी है कि IBJA के ये बेंचमार्क रेट अंतिम खुदरा कीमत नहीं होते। ज्वेलरी खरीदते समय GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं, इसलिए दुकान पर मिलने वाला अंतिम भाव अलग हो सकता है।

चांदी ने क्यों दिखाई ज्यादा हलचल?

इस पूरे घटनाक्रम में चांदी सबसे ज्यादा चर्चा में है। अक्टूबर में जहां सोने में लगभग 7 फीसदी की गिरावट आई, वहीं चांदी करीब 20 फीसदी टूट गई। यही वजह है कि नवंबर की शुरुआत में चांदी की रिकवरी भी ज्यादा तेज दिखाई दी।

2 नवंबर को MCX पर चांदी में 1.6 फीसदी से अधिक की तेजी देखने को मिली और कीमत ₹1.81 लाख से ऊपर पहुंच गई। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक-दो दिन की तेजी को ट्रेंड बदलने का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

चांदी की कीमतों में निवेश कीमती धातु की मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग से भी प्रभावित होता है। इसी वजह से इसमें सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

अब आगे सोने का भाव किस दिशा में जा सकता है?

बाजार विशेषज्ञों की नजर अब सोने के महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर है। 2 नवंबर के बाजार विश्लेषण के मुताबिक MCX सोने के लिए लगभग ₹1,37,500-₹1,38,300 का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा था, जबकि ₹1,40,000-₹1,41,000 के आसपास रेजिस्टेंस नजर आ रहा था।

अगर सोना इस रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो बाजार में स्थिरता और आगे की रिकवरी की उम्मीद मजबूत हो सकती है। लेकिन अगर कीमत फिर से सपोर्ट स्तर के नीचे जाती है तो दबाव दोबारा बढ़ सकता है।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अक्टूबर की गिरावट पूरी तरह खत्म हो गई है।

चांदी के लिए कौन से स्तर महत्वपूर्ण हैं?

चांदी के लिए करीब ₹1.78 लाख से ₹1.80 लाख प्रति किलोग्राम का क्षेत्र सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं ₹1.86 लाख से ₹1.88 लाख का क्षेत्र तत्काल रेजिस्टेंस माना गया है।

यदि चांदी लगातार इस रेजिस्टेंस के ऊपर मजबूती दिखाती है तो बाजार में तेजी का भरोसा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, सपोर्ट टूटने पर फिर से बिकवाली का दबाव आ सकता है।

यानी फिलहाल चांदी में मुनाफे की संभावना के साथ जोखिम भी ज्यादा है।

धनतेरस और दिवाली से पहले क्या करें खरीदार?

नवंबर की शुरुआत में आई रिकवरी ने उन लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है जो धनतेरस या दिवाली पर सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ कीमत में गिरावट देखकर पूरी रकम एक साथ निवेश करना जरूरी नहीं है।

यदि खरीदारी पहले से तय है तो चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना जोखिम को कम करने का एक तरीका हो सकता है। खासकर चांदी में, क्योंकि इसमें हाल के दिनों में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को BIS हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज, GST, शुद्धता और पुराने आभूषण के बायबैक नियमों को जरूर देखना चाहिए।

अमेरिका का डेटा भी तय कर सकता है अगली दिशा

आने वाले दिनों में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें सोने-चांदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगी। 6 नवंबर को आने वाला अमेरिकी रोजगार आंकड़ा भी बाजार की नजर में एक बड़ा ट्रिगर है। यदि रोजगार आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में सख्ती की उम्मीद कम होती है तो सोने-चांदी को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत मजबूत आर्थिक आंकड़े और ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद इन पर फिर दबाव डाल सकती है।

क्या अक्टूबर की गिरावट के बाद शुरू हो गई है नई तेजी?

फिलहाल इसका जवाब पूरी तरह हां कहना मुश्किल है। नवंबर की शुरुआत में सोने और चांदी में रिकवरी जरूर आई है, लेकिन अक्टूबर में हुई भारी गिरावट को देखते हुए बाजार अभी भी सावधानी के दौर में है।

सोने में केंद्रीय बैंक की मांग, वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की भूमिका लंबे समय में समर्थन दे सकती है। दूसरी ओर चांदी को औद्योगिक मांग से भी फायदा मिल सकता है। लेकिन दोनों धातुओं के लिए अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर, कच्चा तेल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां आने वाले दिनों में अहम भूमिका निभाएंगी।

सोने-चांदी के भाव में अक्टूबर की भारी गिरावट के बाद नवंबर की शुरुआत में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिला है। सोने ने निचले स्तरों से रिकवरी की कोशिश की है, जबकि चांदी ने अपेक्षाकृत तेज वापसी दिखाई है। हालांकि बाजार अभी भी अस्थिर है और मौजूदा तेजी को पक्की तेजी मानना जल्दबाजी होगी।

धनतेरस और दिवाली से पहले घरेलू मांग कीमतों को सहारा दे सकती है, लेकिन अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, रोजगार आंकड़े, डॉलर और कच्चे तेल की चाल बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम रहेंगे। इसलिए खरीदारों और निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ एक दिन की तेजी देखकर फैसला लेने के बजाय कीमतों की आगे की चाल और अपने निवेश उद्देश्य को ध्यान में रखा जाए।

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