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गंगा से कंधार तक: भारत में फ्लाइट हाईजैकिंग की पूरी कहानी

मध्य-पूर्व में लंबे अरसे बाद किसी प्लेन को हाईजैक करने का प्रयास किया गया। 1 अक्टूबर को दुबई से इजरायल की राजधानी तेल अवीव जा रही ही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 को ओमानी मूल के एक पायलट ने अगवा करने की कोशिश की। भारतीय पायलट स्मित माछर की सूझबूझ और बहादुरी से बड़ा हादसा टल गया। 

70 और 80 के दशक में इजरायल को प्लेन हाईजैकिंग की घटनाओं से खूब जूझना पड़ा। 1970 से 1999 तक भारत भी कई फ्लाइट हाईजैकिंग का गवाह बना। अधिकांश हाईजैक प्लेन को पाकिस्तान ले जाया गया। IC – 814 का अगवा होना भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। आज की स्टोरी उन विमान हाईजैकिंग की घटनाओं की, जिनसे अतीत में भारत को जूझना पड़ा। 

विमान अगवा करने से पहले हाशिम कुरैशी 1969 में पाकिस्तान के पेशावर गया था। यहां उसकी मुलाकात अलगाववादी नेता मकबूल भट से हुई। भट के कहने पर हाशिम ने नेशनल लिबरेशन फ्रंट को ज्वाइन किया था।

भारतीय विमान को जब हाशिम अगवा करके पाकिस्तान पहुंचा तो वहां उसका हीरो की तरह स्वागत हुआ। विपक्षी नेता जुल्फिकार अली भुट्टो खुद एयरपोर्ट पहुंचे। 1981 में पत्रकार बीएम सिन्हा की किताब ‘सांबा स्पाइंग केस’ में दावा किया गया कि हाशिम कुरैशी भारतीय खुफिया एजेंसी एजेंट थे। बाद में पाकिस्तान की अदालत ने हाशिम कुरैशी को 13 साल की सजा सुनाई। हालांकि 7 साल बाद ही रिहा कर दिया गया। उसका चचेरा भाई अल्ताफ कुरैशी लाहौर विश्वविद्यालय में कश्मीर अध्ययन का प्रोफेसर बन गया।

फ्लाइट आईसी 427: दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-427 को 24 अप्रैल 1993 को अगवा कर लिया गया। मोहम्मद यूसुफ शाह पैर में प्लास्टर के साथ चढ़ा। उसने चोटिल होने का नाटक किया। प्लास्टर में ही हथियार को छिपा रखा था। विमान के टेक-ऑफ के बाद उसने प्लेन को अगवा कर लिया। उसने विमान को अफगानिस्तान मोड़ने की मांग की। पाकिस्तान ने अपने वायुक्षेत्र में विमान को दाखिल होने से मना कर दिया। नतीजा यह हुआ कि विमान को अमृतसर में ही उतारना पड़ा।

भारत ने अपहरणकर्ता से लंबी बातचीत की। दूसरी तरफ कमांडो ऑपरेशन की तैयारी की। एनएसजी की एक टीम को रात के अंधेरे में विमान के चारों तरफ तैनात कर दिया गया। एक दिन बाद 25 अप्रैल को भारत सरकार ने ऑपरेशन की मंजूरी दी। एनएसजी कमांडो विमान के इमरजेंसी और अन्य गेट से घुसे। अपहरणकर्ता के पलटवार करने से पहले उसे मौत के घाट उतार दिया। महज 5 मिनट में भारतीय सुरक्षाबलों ने चालक दल समेत 141 यात्रियों को सकुशल बचा लिया।

फ्लाइट IC- 414: 20 दिसंबर 1978 को लखनऊ से दिल्ली जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC 414 को अगवा कर लिया गया। विमान में 130 यात्री सवार थे। उसे वाराणसी एयरपोर्ट पर उतारा गया। यूपी के रहने वाले देवेंद्र पांडेय और भोलानाथ पांडेय ने खिलौने वाली पिस्तौल के दम पर विमान को अगवा किया था। 

इनकी तीन मांगें थीं

  • इंदिरा गांधी को रिहा किया जाए।
  • संजय और इंदिरा पर दर्ज मुकदमे खत्म हो।
  • केंद्र की जनता पार्टी सरकार इस्तीफा दे।

सरकार ने दोनों अपहरणकर्ताओं की मांगें नहीं मानी। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में इंदिरा गांधी के जेल से छूटने पर दोनों को इनाम मिला। विधायक का टिकट मिलते ही दोनों अपहरणकर्ता यूपी विधानसभा भी पहुंचे।

लाहौर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद पाकिस्तान ने कमांडो ऑपरेशन चलाकर अपहरणकर्ता गजिंदर सिंह, तेजिंदर सिंह, सतनाम सिंह, दलबीर सिंह और करण सिंह को गिरफ्तार कर लिया। सभी को 14 साल की सजा हुई। 

1997 में तेजिंदर पाल सिंह और सतनाम सिंह भारत आ गए। करण सिंह और दलबीर सिंह को स्विट्जरलैंड में शरण मिली। गजिंदर सिंह ने साल 2024 में पाकिस्तान के लाहौर में अपनी आखिरी सांस ली। आरोपियों ने अपहण में अखबार में लिपटे आमरूद को ग्रेनेंड के रूप में इस्तेमाल किया। साल 1981 से 84 तक चार और विमानों को अगवा किया गया। सभी विमानों को पाकिस्तान की तत्कालीन जनरल जिया की सरकार ने समर्थन दिया। 


एयर इंडिया फ्लाइट 224: भाड़े के हथियारबंद लोगों ने 1981 में इयर इंडिया के फ्लाइट 224 को अगवा कर लिया। यह विमान जाम्बिया से मुंबई आ रहा था। विमान में 13 चालक दल के सदस्य और 65 यात्री सवार थे। ईंधन भरने के लिए विमान को सेशेल्स के माहे एयरपोर्ट पर उतारा गया। 

अफ्रीका के करीब 47 आंतकवादी माहे एयरपोर्ट पर घुस गए। सुरक्षाबलों से मुठभेड़ शुरू हुई तो इन आंतकियों ने एयर इंडिया के विमान पर कब्जा कर लिया। हथियारबंद आतंकियों ने पायलट उमेश सक्सेना पर विमान को दक्षिण अफ्रीका के डरबन ले जाने का दबाव बनाया। हालांकि उमेश ने ऐसा करने मना कर दिया। इसके बाद सेशेल्स की सरकार ने लगभग 6 घंटे तक आतंकियों से बातचीत की और सभी यात्रियों की सकुशल वापसी सुनिश्चित हुई। यह विदेशी धरती पर भारतीय प्लेन का पहला अपहरण था।

बाचतीत के बाद अपहरणकर्ता ने आत्मसमर्पण कर दिया। पूरा अपहरण चार घंटे तक चला। विमान को अमृतसर के राजासांसी एयरपोर्ट पर उतारा गया था। अपहरणकर्ता गुरबख्श सिंह मजीठिया ने अकाली नेता हरचंद सिंह लोंगोवाल और उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले से मुलाकात की मांग की थी। विमान में तीन बच्चे और 126 यात्री सवार थे।

जोधपुर फ्लाइट: 20 अगस्त 1982 को इंडियन एयरलाइंस का एक और विमान अगवा किया गया। विमान ने राजस्थान के जोधपुर एयरपोर्ट से उड़ान भरी। उसे दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरना था। पिस्तौल और हैंड ग्रेनेड के दम पर विमान को अगवा करने वाले मनजीत सिंह ने विमान को पाकिस्तान की तरफ मोड़ने पर मजबूर किया। 

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पहले की तरह पाकिस्तान ने इस बार भी विमान को उतरने की मंजूरी नहीं दी। विमान को अमृतसर के राजासांसी एयरपोर्ट पर उतारा गया। तीन घंटे बाद मनजीत ने एक महिला यात्री और उसके बच्चे को रिहा कर दिया। विमान के भीतर भीषण गर्मी होने के कारण उसके दरवाजे खोल दिए। कुछ देर बाद मनजीत बाहर आया। उसने हवाई फायरिंग की। तभी वहां मौजूद सुरक्षाबलों ने उसे मार गिराया।

फ्लाइट IC-405: साल 1984 में विमान अपहरण की दो घटनाओं ने भारत को दहला दिया। पहली घटना 5 जुलाई 1984 की है। श्रीनगर से दिल्ली जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-405 को 9 उग्रवादियों ने अगवा किया। विमान को लाहौर में उतारा गया। लगभग 20 घंटे चली बातचीत के बाद सभी अपहरणकर्ताओं ने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर कर दिया। सभी यात्री सकुशल भारत लौट आए। 

जब ISI ने की अपहरणकर्ताओं की मदद

लाहौर के बाद कराची में विमान ने ईंधन भरा और दुबई की तरफ चल पड़ा। संयुक्त अरब अमीरात के प्रशासन ने विमान को उतरने की मंजूरी नहीं दी। विमान में सिर्फ 5 मिनट का ईंधन बचा था। बाद में इजाजत मिली। भारत और यूएई की सरकार ने अपहरणकर्ताओं से लगभग 14 घंटे बात की। सभी यात्रियों को सही सलामत बचा लिया गया। बाद में सभी अपहरणकर्ताओं को भारत को सौंप दिया गया।

अन्य चर्चित हाईजैकिंग

  • 22 जनवरी 1993 में फ्लाइट आईसी- 810 को अगवा किया गया। विमान लखनऊ से दिल्ली जा रहा था। उसे वापस लखनऊ में उतारा गया। अपहरणकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के आरोप में गिरफ्तार कारसेवकों की रिहाई की मांग की। हालांकि बाद में सरेंडर करना पड़ा।
  • 27 मार्च 1993 में ही एक व्यक्ति ने एक अन्य फ्लाइट अगवा की। उसने विमान को लाहौर ले जाने का दबाव डाला। हालांकि पाकिस्तान ने लैंडिंग की मंजूरी नहीं दी। बाद में विमान को अमृतसर में उतारा गया। आरोपी ने आत्मसमर्पण किया। उसके पास कोई विस्फोटक नहीं मिला। जांच में पता चला कि उसने हेयर ड्रायर से अपहरण को अंजाम दिया था।
  • चार छात्रों ने लखनऊ से दिल्ली जा रहे विमान को अगवा किया। बाद में सभी छात्रों को काबू कर लिया। यह घटना 10 अप्रैल 1993 की है। 14 दिन बाद यानी 24 अप्रैल 1993 को ही दिल्ली से श्रीनगर जाने वाली आईसी- 427 फ्लाइट को अगवा किया गया। पाकिस्तान के लैंडिग से इनकार के बाद विमान को अमृतसर में उतारा गया। सुरक्षाबलों ने आरोपी को काबू कर लिया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाच लिया।

विमान को पहले लाहौर ले जाया गया। लैंडिंग की इजाजत नहीं मिलने पर उसे अमृतसर में उतारा गया। कुछ देर में ही हाईजैकरों ने विमान को दोबारा लाहौर ले जाने पर मजूबर किया। अबकी बार लैंडिंग की इजाजत मिल गई। इसके बाद विमान ने काबुल की तरफ अपना रुख किया। यहां रात में उतरने की सुविधा नहीं थी। फ्लाइट को दुबई ले जाया गया और एयरबेस में उतारा गया। यूएई के दखल के बाद आतंकियों ने 27 महिलाओं और बच्चों को रिहा कर दिया। 

आतंकियों ने चाकू से यात्री रूपिन कात्याल की हत्या कर दी थी। उनका शव भी दुबई में उतारा गया। यह संकट करीब आठ दिनों तक चला और अंततः यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार को आतंकियों के साथ समझौता करना पड़ा। 25 दिसंबर को विमान कंधार एयरपोर्ट पर उतरा। 31 दिसंबर को तीन आंतकियों के बदले सभी यात्रियों को रिहा कर दिया गया। 1 जनवरी 2000 को विमान भी भारत लौट आया।

भारत को इन्हें छोड़ना पड़ा

  • मसूद अजहर
  • अहमद उमर सईद शेख
  • मुश्ताक अहमद जरगर

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