Wednesday, 14 October 2026 LATEST NEWS • BEYOND LIMITS
India

जयशंकर बोले- भारत ‘मिडिल पावर’ नहीं, ‘पावर इन द मिडिल’

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को ‘मिडिल पावर’ (मध्यम शक्ति) कहना उसकी वास्तविक क्षमता को सीमित करके देखने जैसा है। उन्होंने कहा कि भारत की विशाल आबादी, बड़ी अर्थव्यवस्था और बढ़ती क्षमताओं को देखते हुए देश को इस नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। जयशंकर ने वित्तीय तंत्रों और प्रतिबंधों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी और भारत की विदेश नीति को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप तय करने पर जोर दिया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को एक कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को ‘मिडल पावर’ (मध्यम शक्ति) कहा जाना पसंद नहीं है, क्योंकि देश की आबादी, आर्थिक आकार और विकास की क्षमता को देखते हुए यह शब्द उसकी स्थिति को सीमित करता है। जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल पॉवर स्ट्रक्चर (वैश्विक शक्ति ढांचे) में बीच की स्थिति वाले देशों को अपने हितों का आकलन करने, स्वतंत्र नीतियां बनाने और एक-दूसरे के साथ मिलकर व्यवस्थाएं बनाने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, ‘एक ‘मिडल पावर’ होने के बजाय, एक तरह से हम ‘बीच में मौजूद शक्तियां’ हैं। असल में ‘मिडल पावर’ की परिभाषा क्या होगी? प्रधानमंत्री के शब्दों में कहें तो, वे देश जिनमें दूसरों को सशक्त बनाने की ताकत हो।’

महत्वपूर्ण संसाधनों और वित्तीय तंत्र पर क्या कहा?
जयशंकर ने बदलती वैश्विक व्यवस्था में आर्थिक परस्पर निर्भरता के बढ़ते महत्व और रणनीतिक संसाधनों और वित्तीय प्रणालियों के शस्त्रीकरण से उत्पन्न जोखिमों पर भी प्रकाश डाला। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय माहौल को ‘संकुचन बिंदुओं की दुनिया’ बताते हुए उन्होंने कहा कि देश महत्वपूर्ण संसाधनों और वित्तीय तंत्रों पर अपने नियंत्रण का उपयोग करके दूसरों पर दबाव डाल सकते हैं। आज की दुनिया में कई तरह के अवरोध पैदा करने वाले बिंदु हैं और आप जानते ही हैं कि इनका इस्तेमाल हथियार के तौर पर करने की प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि वित्त भी एक अवरोध है, प्रतिबंध भी एक अवरोध हैं। मेरा मतलब है, लोग वित्त या अमेरिकी डॉलर पर अपनी पकड़ का दुरुपयोग हथियार के रूप में कर रहे हैं।

हालांकि, जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलावों को निराशावादी नजरिए से देखने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन मुझे अब भी लगता है कि हमें इस परिवर्तन की प्रक्रिया के बारे में निराशावादी दृष्टिकोण नहीं रखना चाहिए।’ यह चर्चा नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का हिस्सा थी , जहां जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रूड और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी मौजूद रहे।

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