री-काउंटिंग की रिकॉर्डिंग नहीं मिलने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग को दिया अल्टीमेटम
चुनावी प्रक्रिया में रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा और बीजेपी के डीएन जीवराजा के बीच चुनावी विवाद की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि री-काउंटिंग यानी दोबारा मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिल रही है.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग अपने रिकॉर्ड के खोने की बात कैसे कह सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को अगली सुनवाई पर उपलब्ध सभी रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि वह यह कैसे कह सकता है कि उसके पास संबंधित रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. अदालत ने कहा कि चुनाव कराना आयोग का मुख्य काम है और इसके लिए जरूरी दस्तावेजों का सुरक्षित रहना बेहद महत्वपूर्ण है.
‘हल्के में नहीं लिया जा सकता’
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के इस जवाब पर भी नाराजगी जताई कि रिकॉर्ड खोजने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट ने सवाल किया कि जब संबंधित रिकॉर्ड चुने गए उम्मीदवार को दिया गया था, तो फिर उसके सुरक्षित रखे जाने की व्यवस्था क्यों नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की उपलब्धता को हल्के में नहीं लिया जा सकता. अदालत ने आयोग से कहा कि अगली तारीख तक उसके पास जो भी रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, उन्हें पेश किया जाए.
प्रतिकूल निष्कर्ष की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई पर संबंधित रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए, तो अदालत आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के कमजोर बहाने स्वीकार नहीं किए जाएंगे. गौरतलब है कि चुनावी विवादों में मतगणना और री-काउंटिंग से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं. ऐसे रिकॉर्ड से यह समझने में मदद मिल सकती है कि दोबारा मतगणना की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई और उससे जुड़े नियमों का पालन हुआ या नहीं.


