राजस्थान

राजस्थान के किसानों का साथ छोड़ रहा मान्सन,80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

राजस्थान के किसानों का साथ छोड़ रहा मान्सन,80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

राजस्थान के किसानों की कमर तोड़ दी है। पिछले 16 साल में सबसे भयंकर मॉनसून फेलियर (Severe monsoon failure) के बाद खेतों की मिट्टी तक सूख गई है। पाली और जैसलमेर जैसे ज़िलों में आधी से ज़्यादा गायब है।

सरकार ने 14 ज़िलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है।राजस्थान में इस बार मॉनसून ने किसानों का साथ छोड़ दिया।

मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक,राज्य में सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। ये पिछले 16 सालों की सबसे बड़ी कमी है। ये सूखा किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान को अपनी चपेट में ले रहा है।सबसे बुरा हाल पाली ज़िले का हैजहां सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश हुई। इसके बाद जैसलमेर (54 प्रतिशत कम) और जालोर (50 प्रतिशत कम) का नंबर आता है।

बांसवाड़ा में 39 फीसदी और सिरोही में 36 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। इन आंकड़ों का मतलब है कि खेतों में नमी नहीं बची है।

कम बारिश का सबसे तीख़ा असर खरीफ की फसलों पर पड़ा है। बाजरामूंग और ग्वार जैसी फसलें पूरी तरह बारिश के भरोसे चलती हैं। कृषि विभाग के शुरुआती अनुमानों में इन फसलों की पैदावार घटने की आशंका जताई गई है। राजस्थान ग्वार प्रोडक्शन का बड़ा सेंटर है। ऐसे में पैदावार गिरने से किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा।

लेकिन संकट सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। पश्चिमी राजस्थान में पशुपालन किसानों की दूसरी बड़ी आमदनी का ज़रिया है। बारिश न होने से चारे की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। मजबूरी में पशुपालक अपनी भेड़-बकरियां बेच रहे हैं। अनुमान है कि अब तक लगभग 20 फीसदी भेड़-बकरियां बेची जा चुकी हैं।

पानी की स्थिति भी कम डरावनी नहीं है। राज्य के 693 बड़े बांधों में से 216 पूरी तरह खाली हो चुके हैं। जोधपुर जल संसाधन क्षेत्र के बांधों में सिर्फ 15.72 फीसदी पानी बचा है जबकि पिछले साल ये 80 प्रतिशत से ज़्यादा था।

हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने कदम उठाया है। आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, 14 ज़िलों की 80 तहसीलों को अति गंभीर या मध्यम सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इनमें जोधपुर की सबसे ज्यादा 12 तहसीलें शामिल हैं। जालोर और बाड़मेर की 10-10,बालोतरा की 9 और पाली की 8 तहसीलें लिस्ट में हैं।

सूखाग्रस्त घोषित होने से इन इलाकों में राहत काम शुरू किए जा सकेंगे। सरकार ने चारा डिपो खोलने और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने का भरोसा दिया है।

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