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राजनाथ सिंह का सेना को निर्देश, भविष्य के युद्धों के लिए अभी से बनाएं रणनीति

राजनाथ सिंह का सेना को निर्देश, भविष्य के युद्धों के लिए अभी से बनाएं रणनीति

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया है। 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सेना को अगले 20 से 30 वर्षों की संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी चाहिए। इसके साथ ही मौजूदा और तेजी से उभर रहे खतरों से निपटने के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है।

ऑपरेशन सिंदूर से मिली अहम सीख

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान में नवाचार, बेहतर समन्वय, आपसी तालमेल और आधुनिक हथियारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने जोर दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

आधुनिक युद्ध में तकनीक और संयुक्त अभियानों की अहमियत

राजनाथ सिंह के मुताबिक, बदलते युद्ध परिदृश्य में विभिन्न सैन्य इकाइयों और क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने सेना में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त प्रणालियों, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक तकनीकों को मजबूत करने पर जोर दिया। सुरक्षित संचार नेटवर्क का विकास भी सेना की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

जमीनी सेना की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण

रक्षा मंत्री ने कहा कि हवाई, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ने के बावजूद भूमि पर होने वाले सैन्य अभियानों का महत्व कम नहीं हुआ है। जमीनी सेना भविष्य के संघर्षों में भी अहम भूमिका निभाती रहेगी।

इस अवसर पर उन्होंने भारतीय सेना की लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी की। इसका उद्देश्य युद्ध के बदलते स्वरूप और आने वाले समय की चुनौतियों के अनुरूप सेना की रणनीति और तैयारियों को दिशा देना है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की प्रगति

राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, रक्षा निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर रहा।

उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में सुधार लगातार जारी रहने चाहिए। वर्ष 2025 को ‘ईयर ऑफ रिफॉर्म्स’ के रूप में रेखांकित करते हुए उन्होंने सैन्य कमांडरों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किए जा रहे बदलावों का वास्तविक लाभ सेना की परिचालन क्षमता में दिखाई दे।

आत्मनिर्भरता और सैन्य क्षमता बढ़ाने पर जोर

रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, मानव संसाधन प्रबंधन में सुधार करने और सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जर्नल का अनावरण किया और संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया।

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