Maharashtra

सीएम फडणवीस की पहल: पालघर के 25 हजार स्कूली बच्चों के लिए बनेगा केंद्रीय रसोईघर

सीएम फडणवीस की पहल: पालघर के 25 हजार स्कूली बच्चों के लिए बनेगा केंद्रीय रसोईघर

पालघर, 22 अक्टूबर । महाराष्ट्र सरकार आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में पहल कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका में प्रतिदिन 25 हजार बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाला अत्याधुनिक केंद्रीय रसोईघर स्थापित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

इस परियोजना के लिए करीब डेढ़ एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय रसोईघर के निर्माण और संचालन के लिए आवश्यक सरकारी अनुमतियां और मंजूरियां लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

विक्रमगढ़ के 273 स्कूलों में पढ़ते हैं 29 हजार से अधिक विद्यार्थी

शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, विक्रमगढ़ तालुका के 273 स्कूलों में कुल 29,124 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें जिला परिषद के स्कूलों में 15,091 विद्यार्थी, आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूलों में 2,636 विद्यार्थी और अनुदानित आदिवासी स्कूलों में 3,607 विद्यार्थी शामिल हैं।

प्रस्तावित केंद्रीय रसोईघर का उद्देश्य इन क्षेत्रों के बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। उम्मीद है कि इससे बच्चों के पोषण में सुधार होगा, स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ेगी और पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

शुरुआत में 2 से 3 हजार बच्चों को मिलेगा भोजन

योजना के तहत केंद्रीय रसोईघर की अंतिम क्षमता प्रतिदिन 25 हजार विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने की होगी। हालांकि, शुरुआत में लगभग 2 हजार से 3 हजार विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराने की योजना है। इसके बाद सरकारी मंजूरियों, संचालन की तैयारियों और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर परियोजना का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जाएगा।

राज्य सरकार की योजना इस मध्याह्न भोजन कार्यक्रम को जिला परिषद, स्वयं वित्तपोषित और निजी अनुदानित स्कूलों के साथ-साथ सरकारी मानदंडों के अनुसार पात्र अनुदानित आदिवासी स्कूलों तक पहुंचाने की है। पात्र स्कूलों को धीरे-धीरे योजना में शामिल किया जाएगा।

भोजन की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा जोर

परियोजना के तहत भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने और व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रिपोर्ट तैयार करने, स्वतंत्र संस्थाओं से लेखा परीक्षण कराने और योजना के परिणामों का मूल्यांकन करने जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं।

पालघर के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, केंद्रीय रसोईघर का निर्माण और संचालन आवश्यक सरकारी मंजूरियां मिलने के बाद ही आगे बढ़ सकेगा। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है।

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