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SIR के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन, जमानत के बाद CJP नेताओं से क्राइम ब्रांच करेगी पूछताछ

SIR के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन, जमानत के बाद CJP नेताओं से क्राइम ब्रांच करेगी पूछताछ

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 23 अक्टूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ नामक गठबंधन ने इस आंदोलन की घोषणा की है। इसमें नागरिक संगठनों, छात्र संघों, किसान संगठनों और अल्पसंख्यक संगठनों के शामिल होने की बात कही गई है।

इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका जमानत पर रिहा होने के बाद भी पुलिस जांच का सामना कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को 22 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। अजिंक्य शिंदे को भी जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

‘पीपल अगेंस्ट SIR’ ने किया देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान

आंदोलन के आयोजकों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है। गठबंधन ने 14 अक्टूबर को हुई संयुक्त बैठक के बाद विरोध प्रदर्शन का फैसला लेने की बात कही है।

आयोजकों ने विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन से भी 23 अक्टूबर के आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है। हालांकि, विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की भागीदारी को लेकर स्थिति उनके अलग-अलग बयानों और घोषणाओं पर निर्भर करेगी।

हर हाथ में तिरंगा, हर सड़क जंतर-मंतर’ का नारा

आयोजकों ने ‘हर हाथ में तिरंगा, हर सड़क जंतर-मंतर’ का नारा देते हुए लोगों से शांतिपूर्ण मार्च निकालने की अपील की है। यह आह्वान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और उससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर उठे विवाद के बीच किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में मान्यता देने वाली अधिसूचना रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां प्रदर्शन करने के मामले में CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को गिरफ्तार किया गया था।

आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं?

‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने कई मांगें रखी हैं। इनमें शामिल हैं:

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग।
  • SIR के तहत तैयार मतदाता सूची को रद्द करने की मांग।
  • मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ना।
  • चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त करना।
  • चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाना।
  • बैलेट पेपर से मतदान कराने की व्यवस्था लागू करना।

ये आंदोलन के आयोजकों की मांगें हैं। इन पर सरकार और चुनाव आयोग का पक्ष अलग से देखना जरूरी है।

जमानत पर रिहा हुए सौरव दास और आशुतोष रांका

रिपोर्ट के अनुसार, एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। दोनों ने कथित तौर पर हलफनामा दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर कानूनी रूप से निर्धारित धरना स्थल नहीं है, तब तक वहां प्रदर्शन करने की अपील नहीं करेंगे।

रिहाई के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया। अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी दी गई है।

किन मामलों में पूछताछ होगी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 188 से संबंधित सरकारी आदेश के कथित उल्लंघन और किसी अन्य की संपत्ति में प्रवेश से जुड़े मामले में जांच के लिए बुलाया है। मामले की जांच जारी है। पुलिस की ओर से पूछताछ के निष्कर्षों की पुष्टि होने तक किसी भी आरोप को सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

क्या CJP नेता देशव्यापी प्रदर्शन में शामिल होंगे?

सौरव दास और आशुतोष रांका 23 अक्टूबर के आंदोलन में शामिल होंगे या नहीं, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में उनकी ओर से कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। उनके हलफनामे में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अपील न करने की शर्त का उल्लेख है, इसलिए उनकी संभावित भागीदारी और प्रदर्शन के स्वरूप को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन और CJP नेताओं से पुलिस की पूछताछ ऐसे समय हो रही है, जब मतदाता सूची की समीक्षा और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। आंदोलन में भागीदारी, पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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