कार्ड से कैश निकालने की ये गलती पड़ सकती है बहुत महंगी! पहले जान लें असली हिसाब
एटीएम से क्रेडिट कार्ड डालकर नकद निकाल लेना बहुत आसान लगता है – न कोई कागजी कार्रवाई, न बैंक की मंजूरी का इंतजार। लेकिन यह सुविधा शायद क्रेडिट कार्ड की सबसे महंगी सुविधा है।
नकद निकालते ही एक साथ तीन तरह के चार्ज लगने शुरू हो जाते हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोग पहले से नहीं जानते। (credit-card-cash-withdrawal-charges-hindi)
दरअसल क्रेडिट कार्ड से खरीदारी और नकद निकासी में बुनियादी फर्क है। खरीदारी पर आपको बिल की तारीख तक ब्याज-मुक्त अवधि मिलती है, लेकिन नकद निकासी पर ऐसी कोई छूट नहीं होती – ब्याज निकासी वाले दिन से ही गिनना शुरू हो जाता है।
एक साथ लगते हैं तीन तरह के चार्ज
पहला है कैश एडवांस शुल्क। एसबीआई कार्ड और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े जारीकर्ताओं के यहां यह शुल्क निकाली गई रकम का २.५ फीसदी या ५०० रुपये – जो भी अधिक हो – लिया जाता है। यानी छोटी रकम पर भी न्यूनतम ५०० रुपये का शुल्क तय है।
दूसरा है ब्याज, जो निकासी के पहले दिन से लगना शुरू होता है। एसबीआई कार्ड पर यह दर ३.७५ फीसदी प्रति माह तक हो सकती है, जबकि एचडीएफसी बैंक के कार्डों पर यह १.९९ से ३.५ फीसदी प्रति माह के दायरे में रहती है (कार्ड की शर्तों के अनुसार)। तीसरा है इन शुल्कों पर लगने वाला जीएसटी – शुल्क और ब्याज दोनों पर १८ फीसदी जीएसटी जुड़ता है, जिससे कुल बोझ और बढ़ जाता है।
२०,००० रुपये का उदाहरण हिसाब खुद लगाएं
मान लीजिए आपने क्रेडिट कार्ड से २०,००० रुपये नकद निकाले और ३० दिन बाद चुकाया। पहले कैश एडवांस शुल्क लगेगा – २.५ फीसदी यानी ५०० रुपये (न्यूनतम सीमा के बराबर)। फिर ३० दिन का ब्याज – उदाहरण के लिए ३.५ फीसदी मासिक दर पर यह करीब ७०० रुपये बनेगा। इन दोनों पर १८ फीसदी जीएसटी जोड़ें तो करीब २१६ रुपये और जुड़ जाएंगे।
यानी २०,००० रुपये के नकद के लिए सिर्फ ३० दिन में लगभग १,४१६ रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ेंगे – कुल करीब २१,४१६ रुपये। और यह हिसाब तब है जब आपने एक महीने में चुका दिया; देरी होने पर ब्याज चक्रवृद्धि रूप से बढ़ता चला जाता है। ध्यान रहे, दरें हर बैंक और हर कार्ड में अलग-अलग होती हैं – अपने कार्ड की दर-सूची (एमआईटीसी) जरूर देख लें।
बेहतर विकल्प क्या हो सकते हैं
अगर नकद की जरूरत बार-बार पड़ती है तो सबसे अच्छा बचाव है छोटा-सा आपातकालीन फंड बनाकर रखना – बचत खाते में तीन से छह महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम। इससे न ब्याज देना पड़ेगा, न शुल्क।
एक और बात जानना जरूरी है – क्रेडिट कार्ड से नकद निकालने की सीमा भी तय होती है, जो आमतौर पर कुल क्रेडिट लिमिट का एक हिस्सा होती है। यानी अगर आपकी क्रेडिट लिमिट एक लाख रुपये है तो आप पूरा एक लाख नकद नहीं निकाल सकते। इसके अलावा नकद निकासी पर कोई रिवॉर्ड पॉइंट भी नहीं मिलता – यानी आप ज्यादा खर्च करके भी कोई फायदा नहीं उठा पाते। यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार इसे सिर्फ अंतिम विकल्प मानते हैं।


