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माल ढोने वाले ट्रकों की जांच का तरीका बदला,

माल ढोने वाले ट्रकों की जांच का तरीका बदला,

पहले घूम-घूम कर रोकने वाली ‘रोविंग स्क्वॉड’ थी जो कहीं भी ट्रक रोक लेती थी, अब उसकी जगह ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ होगी जो सिर्फ खुफिया जानकारी के आधार पर रोकेगी, हालांकि माल ले जा रहे वाहनों को रोकने का अधिकार पहले की तरह बना रहेगा.

8 अक्टूबर को 57वीं GST काउंसिल मीटिंग में तय हुआ था कि रास्ते में मनमाने तरीके से ट्रक न रोके जाएं. इस बैठक में ई-वे बिल के आधार पर माल की जांच और वैरिफिकेशन की प्रक्रिया में सुधार को मंजूरी दी गई थी, ताकि मनमानी जांच पर रोक लग सके और राज्यों की सीमाओं के पार माल की आवाजाही आसान हो सके.

ऐसा करने वाला पहला राज्य बना तमिलनाडु

बदलाव लागू होने के बाद अब सिर्फ सप्लायर राज्य या डेस्टिनेशन राज्य के अफसर ही जांच कर सकेंगे, बीच के राज्यों में रोक-टोक नहीं. तमिलनाडु ऐसा निर्देश जारी करने वाला पहला राज्य है, जबकि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) या अन्य राज्यों की ओर से अभी विस्तृत निर्देश आने बाकी हैं.

अब जॉइंट कमिश्नर के लिखित आदेश और टाइम-स्टैम्प वाली इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस के बिना कोई ट्रक नहीं रोका जाएगा, स्क्वॉड जॉइंट कमिश्नर ऑफिस में ही रहेगी. इससे ट्रांसपोर्टरों को राहत मिलेगी और भ्रष्टाचार कम होगा. राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग ने निर्देश दिया है कि टीमें संयुक्त आयुक्त (खुफिया) के कार्यालयों में तैनात रहें. साथ ही वह वाहनों को केवल तभी रोकें जब उनके पास टाइम-स्टैम्प वाले इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में दर्ज कोई ठोस खुफिया जानकारी हो और संयुक्त आयुक्त का निर्देश प्राप्त हो.

अब क्या बदल जाएगा?

किसी वाहन को रोकने से पहले खुफिया जानकारी और वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित अनुमति लेना जरूरी है.वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी लेने से, वाहन को रोकने की प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ेगी.

पिछली जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था, ”काउंसिल ने सिफारिश की है कि सामान की जांच, उसे हिरासत में लेने या जब्त करने का अधिकार केवल सप्लायर राज्य या गंतव्य (डेस्टिनेशन) राज्य के अधिकारी के पास ही होगा.सप्लायर राज्य और गंतव्य राज्य के बीच कहीं भी वाहन को रोककर जांच नहीं की जा सकेगी.”

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